क्रिकेट न्यूज़ टीम इंडिया अपडेट: जुलाई 2026 पढ़ने का समय: 8 मिनट

संजू सैमसन को जिम्बाब्वे दौरे की टीम से बाहर किए जाने के फैसले ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्य चयनकर्ता MSK प्रसाद और पूर्व भारतीय बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने खुलकर गौतम गंभीर की अगुवाई वाले टीम मैनेजमेंट के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आखिर संजू सैमसन को बार बार टीम से बाहर क्यों किया जाता है, और क्या यह फैसला वाकई क्रिकेटिंग लॉजिक पर आधारित है या इसके पीछे कोई और वजह है? आइए पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।

संजू सैमसन को जिम्बाब्वे टीम से बाहर क्यों किया गया?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम का ऐलान किया, जिसमें संजू सैमसन का नाम गायब था। यह वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले ही टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता था। संजू सैमसन की फॉर्म में हाल के दिनों में गिरावट जरूर आई, आयरलैंड के खिलाफ उन्होंने 5 और 0 रन बनाए, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में सिर्फ 1 रन पर आउट हुए। इन तीन पारियों में कुल मिलाकर सिर्फ 6 रन बनाने के बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन से हटाकर युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया गया, और फिर जिम्बाब्वे सीरीज के लिए पूरी टीम से ही बाहर कर दिया गया।

अजीत अगरकर की अगुवाई वाली मौजूदा चयन समिति के मुताबिक, जिम्बाब्वे दौरे को एक प्रयोगात्मक सीरीज के तौर पर देखा जा रहा है, जहां युवा खिलाड़ियों को मौका देकर बेंच स्ट्रेंथ मजबूत की जानी है। यही वजह है कि पंजाब किंग्स के प्रभसिमरन सिंह जैसे अनकैप्ड खिलाड़ी को पहला अंतरराष्ट्रीय मौका दिया गया, जबकि सीनियर खिलाड़ी संजू सैमसन को आराम के नाम पर टीम से बाहर रखा गया।

MSK प्रसाद का गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट पर तीखा हमला

पूर्व मुख्य चयनकर्ता MSK प्रसाद ने पीटीआई से बातचीत में इस पूरे मामले पर बेहद स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन को महज दो तीन खराब पारियों के आधार पर टीम से बाहर करना जल्दबाजी में लिया गया फैसला है, खासकर तब जब उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप जिताने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

“आखिर हमेशा संजू पर ही गाज क्यों गिरती है? उन्हें बाहर करना बहुत बड़ी भूल है। वे इंग्लिश कंडीशंस में सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं।” : MSK प्रसाद, पूर्व मुख्य चयनकर्ता (PTI से बातचीत में)

MSK प्रसाद ने आगे यह भी जोड़ा कि संजू सैमसन ने हाल ही में संपन्न हुए टी20 वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में मैच जिताऊ पारियां खेली थीं और उसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। ऐसे में सिर्फ दो तीन मैचों में रन न बनने पर उन्हें टीम से बाहर करना क्रिकेटिंग लॉजिक से परे नजर आता है। हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि प्रसाद ने गौतम गंभीर को पूरी तरह कठघरे में खड़ा करने से भी इनकार किया। उनका मानना है कि आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ हुई हार के दौरान हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह जैसे प्रभावशाली खिलाड़ी टीम में मौजूद नहीं थे, इसलिए सिर्फ हेड कोच को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

मोहम्मद कैफ ने भी उठाए टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर सवाल

पूर्व भारतीय बल्लेबाज और चयन समिति से जुड़े रहे मोहम्मद कैफ ने भी संजू सैमसन के बाहर होने पर निराशा जाहिर की। कैफ का कहना है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट ने वही गलती दोहराई है जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान भी देखने को मिली थी। उनके मुताबिक विपक्षी टीमों ने भारत के ओपनिंग कॉम्बिनेशन को ऑफ स्पिनरों के जरिए बार बार निशाना बनाया, जिससे टॉप ऑर्डर लगातार नाकाम होता रहा।

कैफ ने यह भी कहा कि भारतीय टीम मैनेजमेंट की एक बड़ी कमजोरी यह है कि वे बदलाव सिर्फ हार के बाद ही करते हैं, न कि सक्रिय रूप से पहले से योजना बनाकर। उनके अनुसार आयरलैंड सीरीज में हार के बाद और इससे पहले वर्ल्ड कप के दौरान साउथ अफ्रीका से करारी हार के बाद ही टीम में बदलाव देखने को मिले, जो दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट रिएक्टिव अप्रोच अपना रहा है, प्रोएक्टिव नहीं।

गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट का पक्ष क्या है?

दूसरी तरफ, गौतम गंभीर ने इंग्लैंड में तीसरे टी20 मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विवाद पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन को उनकी तरफ से पूरी स्पष्टता (क्लैरिटी) दी जा चुकी है और यह बातचीत सिर्फ एक हेड कोच और खिलाड़ी के बीच की निजी बातचीत है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। गंभीर ने यह भी माना कि टीम को गेम अवेयरनेस और कंडीशंस के हिसाब से एडजस्ट करने की क्षमता में सुधार की जरूरत है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि टीम फिलहाल एक रीसेट के दौर से गुजर रही है क्योंकि हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह जैसे सीनियर खिलाड़ी उपलब्ध नहीं थे।

दिलचस्प बात यह है कि कई रिपोर्ट्स के मुताबिक गौतम गंभीर खुद भी चयन समिति के इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया कि नई चयन समिति के सदस्य अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर फैसले ले रहे हैं, जिससे हेड कोच और सिलेक्टर्स के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि संजू सैमसन का मामला सिर्फ फॉर्म का मसला नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट के भीतर की जटिल गुटबाजी और अधिकारों के टकराव का भी संकेत है।

वैभव सूर्यवंशी बनाम संजू सैमसन: चयन को लेकर छिड़ी बहस

इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू 15 साल के प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी है। MSK प्रसाद ने इस बात पर चिंता जताई कि वैभव सूर्यवंशी को जितनी तेजी से हाई-प्रेशर सीरीज में उतारा गया, उतनी जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक वैभव को आयरलैंड और जिम्बाब्वे जैसी सीरीज में भेजना सही कदम है, लेकिन उन्हें शुरुआत में ही आयरलैंड सीरीज में शामिल न करना एक चूक थी।

पूर्व भारतीय ओपनर पार्थिव पटेल ने भी इस मसले पर दिलचस्प टिप्पणी की। उनका कहना है कि भावना और तर्क के आधार पर फैसले अलग अलग होते हैं, अगर भावनात्मक रूप से देखें तो वैभव सूर्यवंशी को मौका देना सही फैसला था, लेकिन तार्किक रूप से देखा जाए तो संजू सैमसन का प्लेइंग इलेवन से बाहर होना समझ से परे है। पटेल के मुताबिक जब भी कोई खिलाड़ी टीम से बाहर होता है, फैंस और एक्सपर्ट्स में यह धारणा बन जाती है कि वही बेहतर विकल्प था, और यही पैटर्न श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों के मामले में भी देखा जा चुका है।

संजू सैमसन: टी20 वर्ल्ड कप फॉर्म बनाम हालिया सीरीज फॉर्म

नीचे दिए गए आंकड़े साफ दिखाते हैं कि टी20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले संजू सैमसन का फॉर्म ग्राफ इसके बाद कैसे नीचे आया, जिसकी वजह से उन्हें बार बार टीम से बाहर करने का फैसला लिया गया।

टूर्नामेंट/सीरीज पारियां कुल रन औसत स्ट्राइक रेट
टी20 वर्ल्ड कप 2026 5 321 80.25 199.37
आयरलैंड सीरीज (2026) 2 5 2.50
इंग्लैंड सीरीज, पहला टी20 1 1 1.00

यही आंकड़े इस बहस की जड़ में हैं, क्या सिर्फ तीन पारियों के आधार पर किसी टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को टीम से बाहर करना सही फैसला है, या यह जल्दबाजी में लिया गया एक भावनात्मक निर्णय है? यही सवाल MSK प्रसाद और मोहम्मद कैफ जैसे पूर्व दिग्गज बार बार उठा रहे हैं।

वर्कलोड मैनेजमेंट और रोटेशन पॉलिसी पर उठते सवाल

संजू सैमसन विवाद के पीछे एक और बड़ा पहलू है भारतीय टीम मैनेजमेंट की वर्कलोड रोटेशन पॉलिसी। गौतम गंभीर और उनकी सपोर्ट स्टाफ टीम लगातार यह तर्क देती रही है कि युवा खिलाड़ियों को लंबा रन देना जरूरी है, ताकि भविष्य के लिए मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार हो सके। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यही लॉजिक संजू सैमसन जैसे अनुभवी और सिर्फ एक फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ी पर लागू करते समय गायब हो जाता है।

चूंकि संजू सैमसन टीम इंडिया के लिए सभी फॉर्मेट में नहीं खेलते, ऐसे में उन्हें आराम देने का तर्क भी कई क्रिकेट पत्रकारों को संतोषजनक नहीं लगा। दैनिक जागरण से जुड़े खेल पत्रकार अभिषेक त्रिपाठी ने भी इस बात को उठाया कि जो खिलाड़ी पहले से ही सीमित फॉर्मेट खेलता हो, उसे आराम देने की कोई ठोस वजह नहीं बनती। यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट की रोटेशन पॉलिसी को लेकर पारदर्शिता की कमी है, जिससे बार बार यही सवाल उठता है कि आखिर संजू सैमसन के मामले में अलग मापदंड क्यों अपनाए जाते हैं।

क्रिकेट जगत और फैंस की प्रतिक्रिया

संजू सैमसन के टीम से बाहर होने की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ गई। कई पूर्व क्रिकेटरों और फैंस ने चयन समिति के फैसले पर सवाल खड़े किए। हरभजन सिंह जैसे पूर्व दिग्गजों ने भी अतीत में इसी तरह के मौकों पर चयन समिति में बदलाव की मांग उठाई थी, जब संजू सैमसन को बिना पर्याप्त मौका दिए टीम से बाहर किया गया था। इसके अलावा पूर्व चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने भी अलग अलग मौकों पर चयन समिति की निरंतरता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

फैंस के बीच यह धारणा लगातार मजबूत होती जा रही है कि संजू सैमसन को हमेशा सबसे पहले बलि का बकरा बनाया जाता है, चाहे टीम का प्रदर्शन कैसा भी रहा हो। यही वजह है कि जब भी संजू सैमसन को टीम से बाहर किया जाता है, यह खबर तुरंत सबसे ज्यादा चर्चित विषयों में शामिल हो जाती है और क्रिकेट फैंस के बीच भावनात्मक बहस का कारण बनती है।

मुख्य बिंदु एक नजर में

  • संजू सैमसन को जिम्बाब्वे टी20 सीरीज की 15 सदस्यीय टीम से बाहर रखा गया।
  • टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे सैमसन का हालिया फॉर्म सिर्फ 3 पारियों में 6 रन का रहा।
  • MSK प्रसाद ने कहा, सिर्फ 2-3 खराब पारियों पर बाहर करना बड़ी भूल है।
  • मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट की रिएक्टिव अप्रोच पर सवाल उठाए।
  • गौतम गंभीर ने स्पष्टता देने की बात कही, लेकिन बातचीत की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया।
  • वैभव सूर्यवंशी को मौका दिए जाने पर भी राय बंटी हुई है।

आगे क्या? संजू सैमसन की वापसी की कितनी संभावना

गौतम गंभीर ने खुद यह स्पष्ट किया है कि संजू सैमसन के लिए टीम इंडिया में वापसी के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उनके मुताबिक ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है कि एक बार बाहर होने के बाद खिलाड़ी वापसी नहीं कर सकता। लेकिन सवाल यह है कि आने वाली सीरीज में जब सीनियर खिलाड़ी वापस टीम में शामिल होंगे, तब संजू सैमसन के लिए जगह बनाना कितना आसान होगा। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका प्रदर्शन आगे की राह तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

फिलहाल यह साफ है कि संजू सैमसन का मामला सिर्फ एक खिलाड़ी के फॉर्म का मसला नहीं रह गया है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट टीम की चयन प्रक्रिया, रोटेशन पॉलिसी और टीम मैनेजमेंट की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस बन चुका है। जब तक चयन समिति और टीम मैनेजमेंट अपने फैसलों में एकरूपता नहीं दिखाते, तब तक इस तरह के विवाद बार बार सामने आते रहेंगे।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

संजू सैमसन को जिम्बाब्वे टीम से क्यों बाहर किया गया?

चयन समिति के मुताबिक जिम्बाब्वे दौरे को युवा खिलाड़ियों को मौका देने वाली प्रयोगात्मक सीरीज माना गया, जिसके चलते फॉर्म में चल रहे संजू सैमसन को आराम देकर बाहर रखा गया।

MSK प्रसाद ने संजू सैमसन के बारे में क्या कहा?

MSK प्रसाद ने कहा कि सिर्फ दो तीन खराब पारियों के आधार पर टी20 वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू सैमसन को बाहर करना बड़ी भूल है।

क्या मोहम्मद कैफ भी गौतम गंभीर की आलोचना करते हैं?

मोहम्मद कैफ ने सीधे तौर पर गंभीर पर हमला नहीं किया, लेकिन टीम मैनेजमेंट की रिएक्टिव सोच और ओपनिंग कॉम्बिनेशन को लेकर सवाल जरूर उठाए हैं।

क्या संजू सैमसन टीम इंडिया में वापसी कर सकते हैं?

गौतम गंभीर के मुताबिक वापसी की संभावना खत्म नहीं हुई है, लेकिन इसके लिए घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन जरूरी होगा।

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