द हंड्रेड 2026 आईपीएल बिजनेस MI London Sunrisers Leeds Manchester Super Giants

द हंड्रेड 2026 में आईपीएल मालिकों की टीमें अब इंग्लैंड की धरती पर पूरी तरह हावी हो चुकी हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन ग्रुप और RPSG ग्रुप जैसे आईपीएल के बड़े नाम अब इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड (ECB) की सौ गेंद वाली लीग में सीधे मालिकाना हक रखते हैं, और इसी वजह से तीन फ्रेंचाइजी के नाम पूरी तरह बदल दिए गए हैं। 21 जुलाई से शुरू हो रहे छठे सीज़न में फैंस को द ओवल, हेडिंग्ले और ओल्ड ट्रैफर्ड पर बिल्कुल नई जर्सियां, नए रंग और नई पहचान देखने को मिलेगी।

यह सिर्फ नाम बदलने की कहानी नहीं है। यह असल में आईपीएल के कारोबारी मॉडल का ग्लोबल विस्तार है। द हंड्रेड लीग में आईपीएल मालिकों ने टीम कैसे खरीदी, यह सवाल पिछले एक साल से क्रिकेट जगत में सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है, और अब इसका पूरा जवाब सामने आ चुका है। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने जनवरी में आठ फ्रेंचाइजी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी, ताकि काउंटी क्लबों को नया निवेश मिल सके और टूर्नामेंट को वैश्विक स्तर पर बड़ा बनाया जा सके। इस दौड़ में मुंबई इंडियंस, सनराइजर्स हैदराबाद, लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स जैसी आईपीएल फ्रेंचाइजी सबसे आगे रहीं, जबकि चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स ने बोली की दौड़ से खुद को पीछे खींच लिया था।

किस टीम का क्या नाम बदला और कितने में हुई डील?

नीचे दी गई टेबल में द हंड्रेड 2026 की सभी आठ फ्रेंचाइजी की मौजूदा मालिकाना हक की पूरी तस्वीर दी गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ओवल इनविंसिबल्स को MI London क्यों बनाया और सन ग्रुप ने नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स को सनराइजर्स लीड्स में कैसे बदला, इसकी वित्तीय तस्वीर भी इसमें शामिल है।

पुराना नाम नया नाम आईपीएल कनेक्शन हिस्सेदारी अनुमानित डील राशि
Oval Invincibles MI London मुंबई इंडियंस (रिलायंस इंडस्ट्रीज) 49% (Surrey के पास 51%) लगभग £60 मिलियन
Northern Superchargers Sunrisers Leeds सनराइजर्स हैदराबाद (सन ग्रुप) 100% पूर्ण अधिग्रहण लगभग £100 मिलियन
Manchester Originals Manchester Super Giants लखनऊ सुपर जायंट्स (RPSG ग्रुप) 70% (Lancashire के पास 30%) लगभग £81 मिलियन
Southern Brave Southern Brave (नाम अपरिवर्तित) दिल्ली कैपिटल्स (GMR ग्रुप) 49% हिस्सेदारी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं

नोट: बाकी चार फ्रेंचाइजी : बर्मिंघम फीनिक्स, लंदन स्पिरिट, ट्रेंट रॉकेट्स और वेल्श फायर अभी भी अपने पारंपरिक काउंटी ढांचे के तहत ही चल रही हैं, हालांकि इनमें भी निवेश की बातचीत जारी है।

MI London: मुंबई इंडियंस का लंदन विस्तार

ओवल इनविंसिबल्स पिछले तीन सीज़न से पुरुष वर्ग की डिफेंडिंग चैंपियन रही है और महिला वर्ग में भी दो खिताब जीत चुकी है, जिससे यह द हंड्रेड की सबसे सफल फ्रेंचाइजी मानी जाती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस टीम में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर इसे MI London का नाम दिया, जबकि Surrey काउंटी क्रिकेट क्लब बहुसंख्यक हिस्सेदार बना हुआ है। यह डील मुंबई इंडियंस के वैश्विक ब्रांड नेटवर्क की अगली कड़ी है, क्योंकि इसी परिवार के पास पहले से MI Cape Town (साउथ अफ्रीका की SA20 लीग) और MI New York (अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट) जैसी टीमें मौजूद हैं। अब मुंबई इंडियंस ब्रांड पांच अलग अलग देशों में सक्रिय हो चुका है, जो किसी भी क्रिकेट फ्रेंचाइजी के लिए एक अनूठी उपलब्धि है।

MI London मैच के दौरान नीले और सुनहरे रंग की जर्सी में द ओवल का मैदान अब पूरी तरह मुंबई इंडियंस के ब्रांड कलर्स में रंगा नजर आएगा।

Sunrisers Leeds: सन ग्रुप का पूर्ण अधिग्रहण

सन ग्रुप ने नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स को सनराइजर्स लीड्स में बदलने के लिए सबसे बड़ी और सबसे साफ डील की है। इस अधिग्रहण में यॉर्कशायर काउंटी क्लब की कोई हिस्सेदारी नहीं बची है, यानी यह आठ फ्रेंचाइजी में इकलौती ऐसी डील है जिसमें आईपीएल मालिक ने शत प्रतिशत नियंत्रण हासिल किया है। सन ग्रुप पहले से ही आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद और साउथ अफ्रीका की SA20 लीग में सनराइजर्स ईस्टर्न केप का संचालन करता है। नई फ्रेंचाइजी हेडिंग्ले मैदान पर सनराइजर्स हैदराबाद जैसे ही नारंगी और काले रंग में खेलती नजर आएगी, जिससे ब्रांड पहचान में कोई भ्रम न रहे।

Manchester Super Giants: RPSG ग्रुप का लखनऊ मॉडल

RPSG ग्रुप ने मैनचेस्टर ओरिजिनल्स की हिस्सेदारी कितने में खरीदी, इसका जवाब है लगभग £81 मिलियन, जिसके बदले में समूह को 70 प्रतिशत नियंत्रण मिला, जबकि लंकाशायर काउंटी के पास शेष 30 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रही। यह आईपीएल से जुड़ी तीनों डील में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाला सौदा है। RPSG ग्रुप, जो आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स का संचालन करता है, ने टीम के रंग भी बदलकर बैंगनी और सुनहरा कर दिए हैं, जो सीधे लखनऊ सुपर जायंट्स के रंगों से मेल खाते हैं। ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर अब यह टीम पूरी तरह लखनऊ के टेम्पलेट पर आधारित नजर आएगी।

Southern Brave: दिल्ली कैपिटल्स का शांत निवेश

GMR ग्रुप, जो आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स का सह मालिक है, ने हैम्पशायर के साथ मिलकर साउथर्न ब्रेव में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ली है। इस डील में टीम का नाम नहीं बदला गया, लेकिन प्रबंधन ढांचे में बदलाव जरूर आया है। यह दिखाता है कि सभी आईपीएल मालिक जरूरी नहीं कि रीब्रांडिंग की राह पर चलें, कुछ निवेशक बैकग्राउंड में रहकर लंबी अवधि की रणनीति पर काम करना पसंद करते हैं।

द हंड्रेड 2026 नीलामी फॉर्मेट क्या बदला?

निजी निवेश के साथ साथ द हंड्रेड ने अपने खिलाड़ी चयन तंत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब तक चली आ रही ड्राफ्ट प्रणाली को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, और इसकी जगह लंदन में 11 और 12 मार्च को आयोजित पहली बड़ी नीलामी ने ले ली, जो इंग्लैंड के किसी भी खेल आयोजन के इतिहास की पहली बड़ी खिलाड़ी नीलामी मानी जा रही है। यह ढांचा पूरी तरह आईपीएल की तर्ज पर बनाया गया है, जहां हर फ्रेंचाइजी को एक तय सैलरी पूल दिया जाता है और वह रिटेंशन, सीधी साइनिंग और लाइव बोली के जरिए अपनी टीम बनाती है। इसके अलावा विदेशी खिलाड़ियों की सीमा भी तीन से बढ़ाकर चार कर दी गई है, जिससे टीमों को स्क्वॉड बनाने में ज्यादा लचीलापन मिला है।

3 टीमें

आठ में से तीन फ्रेंचाइजी का नाम पूरी तरह बदला गया, तीनों में आईपीएल मालिकों की सीधी हिस्सेदारी है।

£30-120M

अलग अलग डील की अनुमानित राशि, जो टीम की लोकेशन और हिस्सेदारी के आकार पर निर्भर करती है।

21 जुलाई

नए ओनरशिप मॉडल के साथ द हंड्रेड के छठे सीज़न की शुरुआत द ओवल मैदान से हो रही है।

आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों का इंग्लिश क्रिकेट में निवेश क्यों बढ़ रहा है?

आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों का इंग्लिश क्रिकेट में निवेश किसी अचानक फैसले का नतीजा नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही सोची समझी वैश्विक ब्रांड रणनीति का हिस्सा है। मुंबई इंडियंस, सनराइजर्स हैदराबाद और लखनऊ सुपर जायंट्स जैसी फ्रेंचाइजी पहले से ही अमेरिका, साउथ अफ्रीका और यूएई की लीग में अपने सिस्टर टीमों का संचालन कर रही हैं। द हंड्रेड में हिस्सेदारी लेने से इन्हें तीन बड़े फायदे मिलते हैं:

  • ग्लोबल ब्रांड पहचान: एक ही जर्सी रंग और नाम पैटर्न से दुनिया भर के फैंस के लिए ब्रांड को पहचानना आसान हो जाता है।
  • खिलाड़ी नेटवर्क का फायदा: साझा स्काउटिंग, कोचिंग स्टाफ और डेटा एनालिटिक्स सिस्टम से सभी सिस्टर फ्रेंचाइजी को फायदा मिलता है।
  • राजस्व के नए रास्ते: टिकट बिक्री, मर्चेंडाइज और प्रसारण अधिकारों से मिलने वाली आमदनी अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगी।

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि निजी निवेश के बाद द हंड्रेड में टिकट कीमतें, मार्केटिंग बजट और वैश्विक विस्तार को लेकर आक्रामक रणनीति देखने को मिलेगी। हालांकि इंग्लैंड के पारंपरिक क्रिकेट फैंस, जो काउंटी क्रिकेट और टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देते हैं, इस बदलाव को किस नजरिए से देखते हैं, यह आने वाले सीज़न में साफ होगा।

ECB और काउंटी क्लबों को इस निवेश से क्या फायदा हुआ?

द हंड्रेड में आईपीएल मालिकों की एंट्री सिर्फ फ्रेंचाइजी ब्रांडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड और काउंटी क्लबों की बैलेंस शीट पर भी पड़ा है। Surrey, Lancashire और Yorkshire जैसे काउंटी क्लब लंबे समय से घरेलू क्रिकेट ढांचे और युवा खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए फंडिंग की कमी से जूझ रहे थे। हिस्सेदारी बिक्री से मिली एकमुश्त रकम अब इन क्लबों को स्टेडियम अपग्रेड, अकादमी सुविधाएं और महिला क्रिकेट ढांचे में निवेश करने का मौका दे रही है। ECB के लिए भी यह डील रणनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि इससे द हंड्रेड को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम फ्रेंचाइजी लीग के तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी, जो आगे चलकर प्रसारण अधिकारों की कीमत भी बढ़ा सकती है।

हालांकि कुछ काउंटी क्लब समर्थकों ने चिंता जताई है कि लंबी अवधि में बहुसंख्यक हिस्सेदारी भी विदेशी निवेशकों के हाथ जा सकती है, जैसा कि नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स के मामले में हो चुका है, जहां यॉर्कशायर काउंटी की अब कोई हिस्सेदारी नहीं बची। यह बहस आने वाले वर्षों में इंग्लिश घरेलू क्रिकेट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है, खासकर तब जब बाकी बची चार फ्रेंचाइजी में भी निवेश की बातचीत जारी है।

फैंस और क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर द हंड्रेड 2026 में आईपीएल मालिकों की टीमें देखते ही फैंस ने तुरंत तुलना शुरू कर दी कि कौन सी नई जर्सी उन्हें आईपीएल टीम की याद दिलाती है। MI London की नीली सुनहरी जर्सी को मुंबई इंडियंस के फैंस ने खासतौर पर पसंद किया, जबकि सनराइजर्स लीड्स की नारंगी काली किट को हैदराबाद के फैंस से जबरदस्त समर्थन मिला। दूसरी ओर, कुछ अंग्रेजी क्रिकेट पंडितों ने चिंता जताई है कि इससे स्थानीय काउंटी क्लबों की पारंपरिक पहचान कमजोर हो सकती है। यह बहस आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है, खासकर जब सीज़न के दौरान टीमों का प्रदर्शन सामने आएगा।

भारतीय दर्शकों के नजरिए से देखें तो यह पहली बार है जब उन्हें अपनी पसंदीदा आईपीएल फ्रेंचाइजी को इंग्लैंड की धरती पर, अलग खिलाड़ियों और अलग परिस्थितियों में खेलते देखने का मौका मिलेगा। इससे भारत में द हंड्रेड के प्रसारण दर्शकों की संख्या में भी बड़ा उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि MI London और Sunrisers Leeds जैसे नाम खुद ही भारतीय फैंस के लिए एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं। स्पोर्ट्स मार्केटिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यही वह वजह है जिसके चलते प्रसारणकर्ता अब द हंड्रेड के भारतीय प्रसारण अधिकारों को पहले से कहीं ज्यादा कीमत पर खरीदने को तैयार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

द हंड्रेड 2026 में कितनी टीमों के नाम बदले गए हैं?

आठ में से तीन फ्रेंचाइजी के नाम बदले गए हैं, Oval Invincibles अब MI London, Northern Superchargers अब Sunrisers Leeds और Manchester Originals अब Manchester Super Giants कहलाती हैं।

मुंबई इंडियंस ने द हंड्रेड की कौन सी टीम खरीदी?

मुंबई इंडियंस की मालिक कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ओवल इनविंसिबल्स में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी, जिसे अब MI London के नाम से जाना जाता है।

सनराइजर्स लीड्स की मालिक कौन सी कंपनी है?

सन ग्रुप, जो आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद का संचालन करता है, ने नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स में शत प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर उसे सनराइजर्स लीड्स बनाया है।

क्या द हंड्रेड में अब ड्राफ्ट सिस्टम खत्म हो गया है?

हां, 2026 सीज़न से पहले ड्राफ्ट सिस्टम की जगह नीलामी फॉर्मेट लागू किया गया है, जो 11-12 मार्च को लंदन में आयोजित हुई थी।

द हंड्रेड 2026 सीज़न कब शुरू हो रहा है?

छठा सीज़न 21 जुलाई से द ओवल मैदान पर शुरू हो रहा है, जहां नई मालिकाना हक वाली टीमें पहली बार अपने नए रंग-रूप में खेलती दिखेंगी।

कुल मिलाकर, द हंड्रेड 2026 में आईपीएल मालिकों की टीमें अब सिर्फ एक ट्रेंड नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट के बदलते आर्थिक ढांचे का प्रतीक बन चुकी हैं। आने वाले सीज़न में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मॉडल इंग्लैंड में भी उतना ही सफल होता है जितना भारत में आईपीएल ने साबित किया है, या फिर पारंपरिक फैंस का जुड़ाव इस बदलाव के आगे चुनौती बनकर खड़ा होता है।